EMI = P × r × (1+r)ⁿ ÷ ((1+r)ⁿ − 1), जहाँ P loan की रकम, r महीने की ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100) और n कुल महीने हैं।
लंबी अवधि से EMI कम होती है, पर कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है। जितनी EMI आराम से चुका सकें, उतनी कम अवधि लेने से ब्याज बचता है।
हाँ। RBI के repo rate के साथ bank ब्याज दर बदलते हैं। आमतौर पर bank पहले loan की अवधि बदलते हैं; कई bank EMI बदलने का विकल्प भी देते हैं।
पुरानी tax व्यवस्था में मूल रकम पर 80C (₹1.5 लाख की सीमा में) और अपने रहने वाले घर के ब्याज पर section 24(b) में ₹2 लाख तक छूट है। नई व्यवस्था में अपने रहने वाले घर के ब्याज पर ये छूट नहीं मिलती।
Login करके अपने सहेजे हुए हिसाब, badges और settings हर device पर साथ रखें। Login के बिना भी सारे calculators पूरी तरह चलते रहेंगे।
ये preview है, इसलिए login अभी असली DESI ID से जुड़ा नहीं है। Live site पर ये button DESI ID का login page खोलेगा।